Sunday, 24 December 2023

 बुरे समय का भी समय है


बुरे समय का भी समय है

ये जाएगा ये भी तय है


हमको रोना या हँसना है

करना हमको ही निर्णय है


यद्यपि स्वर बाधा करता है

शांत सुनें उसमें भी लय है


कोहरा, शोक, अंधेरा कब तक

रहे हैं शास्वत, क्या संशय है


सृजन नव्यता, नींव गठन हित

टूटन विघटन प्रलय निश्चय है


द्वंद प्रतिबंध में जो हंसता

उसकी निश्चित ही ‘जय’ जय है

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