Sunday, 24 December 2023

 बुरे समय का भी समय है


बुरे समय का भी समय है

ये जाएगा ये भी तय है


हमको रोना या हँसना है

करना हमको ही निर्णय है


यद्यपि स्वर बाधा करता है

शांत सुनें उसमें भी लय है


कोहरा, शोक, अंधेरा कब तक

रहे हैं शास्वत, क्या संशय है


सृजन नव्यता, नींव गठन हित

टूटन विघटन प्रलय निश्चय है


द्वंद प्रतिबंध में जो हंसता

उसकी निश्चित ही ‘जय’ जय है

Tuesday, 19 December 2023

तजता नहीं हूँ हाँ धैर्य पथ मैं

 ठोकर लगी हैं कई बार पथ में

चलता रहा हूँ मगर पूर्ववत मैं


हो बिघ्न बाधा सम्मुख बड़ी ही

झुकता नहीं हूं पर होके नत मैं


है ये परीक्षा यही मानकर ही

देता हूँ अपना शत प्रतिशत मैं


हाँ पैर बेशक होते हैं जख्मी

होने न देता मन क्षत विक्षत मैं


कितना बुरा ही क्यों हो न जाये

तजता नहीं हूँ हाँ धैर्य पथ मैं

जयवर्धन काण्डपाल