ठोकर लगी हैं कई बार पथ में
चलता रहा हूँ मगर पूर्ववत मैं
हो बिघ्न बाधा सम्मुख बड़ी ही
झुकता नहीं हूं पर होके नत मैं
है ये परीक्षा यही मानकर ही
देता हूँ अपना शत प्रतिशत मैं
हाँ पैर बेशक होते हैं जख्मी
होने न देता मन क्षत विक्षत मैं
कितना बुरा ही क्यों हो न जाये
तजता नहीं हूँ हाँ धैर्य पथ मैं
जयवर्धन काण्डपाल
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