Tuesday, 4 September 2012

आलोचना


हर बात के लिए वैसे कायदा कानून बना है.
उड़ती हैं धज्जियाँ अपना रोज का देखना है .

वो सलीके से उस बोर्ड का फोटो खींचता है.
जिस पे लिखा है 'यहाँ फोटो खींचना मना है'.

तमाशबीनों का कैसा जमवाड़ा लगा है देखो,
एक चींटी का हाथी से खुलेआम सामना है.

झोपडियां तोड़ के मॉल का शिलान्यास हुआ,
हर तरफ हो रही इसकी बहुत आलोचना है .

कल रात कोई बेबस अँधेरी गली में लुटा है,
सुना है कि पास में कोई नया थाना बना है.

काँपता क्यों है मेरे पास आने से वो 'जय'.
जब से पता चला उसे कि मेरे पास आइना है.
......................जय.............................