कर ह्रदय को
मजबूत लड़ दर्द से निरंतर.
मौन से होता है
गर शब्दों को कंठ में भर.
पतझड़ तो कुछ
क्षण का आगे तो बसंत है,
उम्मीद के दिए
से कर रोशन तू हर मंजर.
गम की सीलन से
नम है कलेजे की जमीन
सींच आंसुओं से
खुशी न रख सीने को बंजर.
जन्म था तय अगर
सफर भी निश्चित है तय,
मंजिल भी
मिलेगी गर रखा गया जारी सफर.
जिंदगी से जीत
सकता है तो जीत जा ‘जय’
मौत से जीतेगा
ना तू ना ही सम्राट सिकंदर.
..................जयवर्धन............................
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